निजी कंपनी में उच्च पद की 40,000 रुपए की नौकरी और 20,000 रुपए की खुद की कमाई वाले कारोबार में से यदि किसी एक को चुनना हो, तो कौन सा बेहतर होगा और क्यों?

इस प्रश्न के लिए धन्यवाद.

इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए मैं आपसे कुछ प्रश्न पूछना चाहूँगा.. इसपर ध्यान से विचार कीजिये और फिर सोचिये आपको क्या चुनना चाहिए.

उत्तर लिखने से पहले मैं यह कहना चाहता हूँ, कि मैं नौकरी छोड़कर बिज़नस करने के लिए प्रोत्साहन देने के पक्ष में नहीं हूँ, खासकर नौकरीपेशा व्यक्ति जिनके परिवार में केवल नौकरी का ही चलन रहा है, इस बात को जानिए कि बिज़नस करने के लिए केवल कार्यक्षेत्र नहीं, सोचने का तरीका और अपनी प्रवृत्ति भी बदलनी पड़ती है.

तो सीधे छलांग ना लगायें. बिज़नस करना स्विमिंग करने जैसा है.. पहले एक टीचर या कोच की मदद से सीखिए और फिर आगे बढिए.. कुछ ऐसा प्रावधान चुनिए जो अपनी नौकरी के साथ साथ किया जा सके और ५-६ सालों में आपके नौकरी से आने वाले इनकम को बिज़नस इनकम से बदल सके.


तो मेरे प्रश्न कुछ इस प्रकार से हैं –

१. यदि आज आप जिस नौकरी पर जा रहे हैं, चाहे वह कितना भी ऊंचा पद क्यों न हो, यदि कल से जाना बंद कर दें, तो क्या पैसा फिर भी आता रहेगा?

२. यदि रिसेशन हुआ, तो सबसे पहले किसको नौकरी से निकला जाता है – उसे जिसकी सैलरी कम है, या उसे जिसकी सैलरी अधिक है?

३. टैक्स सबसे अधिक कौन भरता है? – जिसकी सैलरी सबसे अधिक है या जिसकी सैलरी कम है?

४. मान लीजिये आप ऑफिस में सुबह 09:०० बजे से लेकर शाम के 06:०० बजे तक कार्य करते हैं, तो 06:०० बजे के बाद और अगले दिन सुबह 09:०० बजे का जो समय है, क्या वह समय भी पैसा बनता है या नहीं??

यदि इन प्रश्नों के उत्तर आपके जीवन और फाईनान्सस के पक्ष में है, और आपके कण्ट्रोल में है, तो आप नौकरी चुन सकते हैं.

यदि नहीं, तो आपको कुछ और सोचने की ज़रूरत है.


क्या आपकी नौकरी हमेशा आपके कण्ट्रोल में है?

हम सब जानते हैं, कि हमारी नौकरी के मामले में हम हमेशा एक तरफ कुआँ दूसरी तरफ खाई वाली ही परिस्थिति में होते हैं.

हमें पता है, कि नौकरी में प्रमोशन के लिए पॉलिटिक्स है, एक दूसरे को गिराने का प्रचलन है, बॉस आपके सिर पर पैर रखकर अपना प्रमोशन लेते हैं, लेकिन फिर भी हमें यह सिखाया गया है कि – जॉब सिक्यूरिटी ढूंढो, महीने के महीने पगार मिलती रहनी चाहिए, और सेफ्टी मिली रहती है.

हमें यह भी पता होता है, कि रिसेशन आया तो बहुत लोगों की नौकरियां जाएँगी, पर फिर भी हम ‘तत्काल संतुष्टि (instant gratification) चुनते हैं..

हमें हमेशा उतना पगार ही दिया जाता है, जिससे कि हम नौकरी पर हर सुबह जाने के लिए प्रोत्साहित होते रहे, और बदले में हम भी उतना ही काम करते हैं, जिससे हमारी नौकरी बनी रहे.

इन दोनों में से जिसकी भी परिस्थिति बदलेगी, खामियाजा हमेशा कर्मचारी ही चुकाएगा.


अंत में मुझे आमिर खान की ‘रंग दे बसंती’ का वह सन्देश याद आता है –

जीवन जीने के दो तरीके होते हैं, या तो सहते जाओ और बर्दाश्त करते जाओ, या फिर ज़िम्मेदारी उठाओ, अपने जीवन को बदलने की?

जब तक कण्ट्रोल किसी और के हाथ में रहेगा, चाहे पगार कितना भी बढ़ जाए, आदमी हमेशा रात को इस डर के साथ सोने जायेगा, कि कल सुबह उसका पद और पैसा रहेगा या नहीं.

पर जिस दिन आप अपना जीवन अपने कण्ट्रोल में लेंगे, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, कि अगले रिसेशन में आपकी नौकरी के साथ क्या होने वाला है…

आशा है, मैं अपना मेसेज शेयर कर पाया

धन्यवाद

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