वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2022 साल 2022 के अंदर मलेरिया को लेकर क्या हालत नजर आते हैं तो पूरे दुनिया भर के अंदर क्या हालत है ?

वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2022 के बारे में तो रिसेंटली वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इस वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2022 को रिलीज किया है जिसके बारे में काफी सारी चर्चा की गई है अब इस आर्टिकल को लिया कहां से गया डाउन टुवर्ड्स से डाउन तू ओवर देख वैन ऑफ डी मोस्ट इंपॉर्टेंट फोर्स है हमारे करंट अफेयर का और यहां से काफी सारे एग्जामिनेशन के अंदर बहुत सारे सवाल हर साल बनते हैं तो इन्होंने यहां पर इस रिपोर्ट के बारे में जिक्र किया है पूरे रिपोर्ट का एनालिसिस दिया है की साल 2022 के अंदर मलेरिया को लेकर क्या हालत नजर आते हैं तो पूरे दुनिया भर के अंदर क्या हालत है वो डिस्कस करेंगे फिर इंडिया को लेकर बातचीत करेंगे तो न्यूज़ क्या है ये तो आपको समझ में ए गया की वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2022 को रिलीज किया गया वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के थ्रू ये बात आपको ध्यान में भी रखनी है पहला पॉइंट क्यों क्योंकि ऐसे सवाल डायरेक्टली बनता है की इस रिपोर्ट को रिलीज करने वाली कौन सी बॉडी है अब बात ये आती है की जो ये रिपोर्ट है ना इसने? क्या-क्या? ज़िक्र किया है सबसे पहले चीज इसमें ये बताया की मलेरिया की वजह से जो होने वाली मृत्यु है ना वो 2021 के अंदर कम हो गई है?

अब मैं आपको कुछ और डाटा समझता हूं कुछ बैकग्राउंड समझता हूं ताकि आपको सारी चीज अच्छे से क्लियर हो देखो साल 2020 के अंदर कोरोना आया फिर साल 2020 हो गया साल 2021 हो गया यहां पर ये जो हमारे साल है ये सारे के सारे कोरोना पेंडेंट में ही निकल गए अब होता यहां पर ये है की इससे पहले साल 2019 में कोरोना हमने नहीं देखा था 2019 वाला प्री pendmik लेवल कहलाता है तो प्री पेड़ में टाइम पीरियड की बात करेंगे कोरोना से पहले की बातचीत करें तो मलेरिया की वजह से लगभग ₹568000 के आसपास यानी ₹568000 लोगों के आसपास की मौत हुई थी मलेरिया की वजह से!

लेकिन 2019 के बाद जवाब 2020 में देखोगे तो कितनी मौत हुई थी 625000 के आसपास फिर 2021 में कितनी मौतें हुई 619000 तो बताया वही जा रहा है? की किस के अंदर मलेरिया की वजह से जो डेथ है ना वो कम हो चुकी हैं 619000 के आसपास यहां पर डेथ हुई हैं हालांकि ये आंकड़ा बहुत बड़ा है लेकिन यहां पे मेंशन किया गया पिछले साल के कंपैरिजन में अबकी बार मृत्यु कम हुई है अब इस पूरे मलेरिया के केसेस का ट्रेंड कैसे चला हुआ ए रहा है इसको समझते हैं अब अगेन ये तो हमने देखा मृत्यु वाला डाटा अब बात करते हैं ओवरऑल केसेस के बारे में तो 2019 में मलेरिया के लगभग 232 मिलियन के आसपास के केस निकल कर आए द फिर 2020 में 245 मिलियन के आसपास निकल कर आए फिर 2021 में 247 मिलियन के आसपास केस निकल कर आए आप ये देखो 2019 से 2020 में बहुत तेजी से केस बड़े फिर 2020 से 2021 में धीमी गति से केस बढ़ रहे हैं 245 से केवल 245 मिलियन हो पाएगा तो धीमी गति से गैस पढ़ रहे हैं तो?

वही चीज यहां पर इस रिपोर्ट के अंदर बताई गई की किस बाद तो रहे हैं मलेरिया के केस हर साल निकल तो रहे हैं लेकिन बहुत स्लोअर रेट से जो गति है वो अभी के समय पर धीमी हो चुकी है ये बात क्लियर हो गई तो इस रिपोर्ट ने ये मेंशन किया फिर बात की जा रही है सिलेरियो हाई बटन कंट्रीज यानी मलेरिया का जो बर्डन है वो? किन-किन? देशों के ऊपर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा तो लगभग 11 ऐसे देश हैं जहां पर सबसे ज्यादा खतरा है मलेरिया का इनमें से जो पंच देश हैं वो? कौन-कौन? से हैं वो है डीआरसी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक? ऑफ कांगो यानी अफ्रीकन कंट्री है गाना हो गया इंडिया हो गया नाइजर और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया?

इन देशों के अंदर पिछले कुछ सालों में मलेरिया की वजह से जो होने वाली मृत्यु हुई नजर आई है? कंट्रीज! हैं ये सबसे ज्यादा केसेस पाए जाते हैं पूरे दुनिया भर में अब हम बात ये करते हैं की इन कंट्रीज के अंदर मलेरिया के केसेस थोड़े से कंट्रोल हुए केसेस तो बहुत सारे हैं मतलब जो मृत्यु वो थोड़ी सी कंट्रोल हो गई है? उसके पीछे का रीजन क्या है रीजन यहां पर ये है की इन कंट्रीज ने क्या किया है इंसेंटिसाइड ट्रीटेड bednates का इस्तेमाल किया यानी की इस मच्छरदानी का जिसको आप लोग बोलते हो ये उसे काफी ज्यादा बढ़ चुका था?

चीज थी एक ऐसा टूल था जिसको इन कंट्रीज ने सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया और इसके चक्कर में मलेरिया के वैसे मृत्यु इन देशों में कम हुई है? ये आती है की मलेरिया इतनी बड़ी प्रॉब्लम है सर हान बिल्कुल इतनी बड़ी प्रॉब्लम है तो इसको खत्म क्यों नहीं किया जा रहा खत्म करने के लिए हम ऑलरेडी बहुत सारे एक्शन प्लांस लेकर चल रहे हैं इंडिया के खुद के अलग-अलग इनीशिएटिव है दुनिया भर में अलग-अलग इनीशिएटिव स्टार्ट हुए हैं हर एक कंट्री यहां पर अलग-अलग इनीशिएटिव स्टार्ट कर चुकी है इंटरनेशनल लेवल पर अलग-अलग इनीशिएटिव है जो की मलेरिया को खत्म कर रहे हैं मैं लगे पड़े हैं लेकिन मैंने कहा खत्म नहीं हो का रहा है उसके पीछे का रीजन क्या है क्योंकि इसको खत्म करने में ढेर सारी परेशानियों नज़र आती है वो हर्डल्स क्या है उसको समझते हैं तो यहां पर मेंशन किया गया की देखो मलेरिया को एंड करना इतना आसान नहीं है क्यों क्योंकि यहां पे जो ये पैरासाइट है ना जो ये मॉस्किटो जो मच्छर यहां पर इस पैरासाइट को फैला रहा है ना इसके अंदर चेंज होने लगता है?

ये बेसिकली यहां पर इसके अंदर एक बदलाव हो जाता है और बदलाव होने के साथ-साथ पता है ये पैरासाइट बहुत स्ट्रांग हो जाता है स्ट्रांग होने का मतलब है आप दवाइयां खाओगे तो भी इसके ऊपर कोई असर नहीं पड़ेगा तो इस कंडीशन वाला भी मलेरिया अफ्रीका के अंदर देखने को मिला तो ये प्रॉब्लम्स यहां पर है जो हमारे पास में 98 टूल्स हैं फंडिंग्स जो हैं वो हम लोग यहां पर तैनात कर रहे हैं सभी जगह पर और इसकी बहुत जरूरत भी ताकि hamleri से लड़ सके और हो क्या रहना की आज के समय पर अन्य फंडिंग की कमी पद रही है बहुत सारी जगह पर प्रॉपर फंडिंग नहीं मिल का रही है जिसकी वजह से कोई इनीशिएटिव प्रॉपर्ली चल नहीं का रहा है बात क्लियर हुई अब आती है बात व्हाट इस मलेरिया आखिरकार मलेरिया है क्या इसके बारे में जान लेना यूपीएससी डायरेक्टली सवाल पूछ लेगा और पहले भी पूछ चुका है तो मलेरिया यहां पर एक जानलेवा बीमारी है जो की मच्छरों से फैलती है पहली चीज यहां पर ये बेसिकली यहां पर एक ब्लड डिजीज है उनके अंदर फैल जाती है कैसे एक पैरासाइट से जिसको हम लोग बोलते हैं पीएलए?

पैरासाइट तो प्लाज्मोडियम पैरासाइट की वजह से बीमारी फैलती है ये बीमारी ज्यादातर आपको ट्रॉपिकल रीजन में देखने को मिलेगी जहां पर सबसे ज्यादा गर्मियां देखने को मिल रही हैं यहीं पर मच्छर सबसे ज्यादा है यहां! पे हो गया साउथ अमेरिका एशिया भी हो गया तो इंडिया भी इसी में ए जाता है ट्रॉपिकल रीजन में ही तो यहां पर सबसे ज्यादा बीमारियां हैं अच्छी बात यहां पर ये है की मलेरिया प्रीवेंटेबल है क्यूरेबल है इसको ठीक किया जा सकता है? आएंगे नहीं तो वो ठीक होने में भी दिक्कत आएगी जैसा आज के समय पर देखने को मिल रहा है? अब साल तक ऐसा है?

कोई जो पैरासाइट है ना ये कैसे फैलता है ये पैरासाइट यहां पर एक मच्छर फैलता है जो एक इनफेक्टेड मच्छर है जो कौन सा मच्छर है ध्यान रखना है एक फीमेल मच्छर होती है फीमेल मच्छर है एनोफिलीस मॉस्किटो? कलीरे को फैलता है बहुत इंपॉर्टेंट चीज है कौन से मच्छर से मलेरिया फैलता है एनोफिलीस मॉस्किटो कई, बार कई, सारे एग्जामिनेशन में ये बात पूछी गई है? उसे समय एक सिंपल सवाल पूछता हूं ये तो आपने जान लिया की हम मलेरिया कौन से मच्छर से फैलता है दूसरी इंपॉर्टेंट चीज जो आपको बतानी है वो है की डेंगू कौन से मच्छर से फैलता है उसे मच्छर का नाम नीचे कमेंट सेक्शन बताओ अब होता यहां पर ये है की जो ये पैरासाइट फैला रहा है ना ये मच्छर है ये जैसे ही बॉडी के अंदर पहुंचता है ना पहुंचने के बाद में ये मल्टीप्लाई होना स्टार्ट हो जाता है और ये हमारे पर्सन के जो भी यहां पर जिस भी व्यक्ति को ही मलेरिया हुआ है होता क्या है उसके बॉडी में पैरासाइट या?

उसकी ब्लड स्ट्रीम में पहुंच गया खून में पहुंच गया और फिर वो खून के तहत लीवर में पहुंच जाता है और फिर वह पैरासाइट ऐसे ही यहां पर थोड़े टाइम पर मेच्योर हो जाता है और ज्यादा बड़े लेवल का हो जाता है एडवांस हो जाता है! वैसे क्या करता है लीवर और जो हमारा रेड ब्लड सेल है आरबीसी इनको इनफेक्ट कर देता है इनको इनफेक्ट करके छोड़ देता है और फिर उसके बाद में अगर उसे मलेरिया हुए वे व्यक्ति को एक मच्छर कटेगा उसमें से वो पैरासाइट निकलकर किसी दूसरी व्यक्ति को काटता है तो इस प्रकार से जो मलेरिया को फैलता वैसे चले जाता है तो ये जो पैरासाइट है ना ये ह्यूमंस के अंदर भी ट्रांसमिट हो सकता है सबसे ज्यादा मॉस्किटो के बिट्स सी में से मच्छर के काटने की वजह से ये ट्रांसमिट भी हो जाता है एक व्यक्ति पहले से इससे आप पैकेट है उसको मच्छर ने काटा फिर जाके दूसरे पे व्यक्तियों काट लिया तो इससे और ज्यादा यहां पर ये फैलने के चांसेस बढ़ जाते हैं क्योंकि होता यहां पर यह जो पैरासाइट मैंने आपको बताया रेड ब्लड सेल को अटैक करता है और इसको यहां पर खत्म कर देता है डिस्ट्रॉय कर देता है आपका सारा ब्लड यहां पर इनफेक्टेड हो जाता है इसके अंदर!

जो पैरासाइट है बेसिकली पंच प्रकार के पैरासाइट की स्पीशीज होती हैं पंच प्रकार वाली होती है लेकिन इनमें से आपको दो के नाम याद रखना है एक है प्लाज्मोडियम फल की परम और दूसरा प्लाज्मोडियम वेबैक्स ये सबसे बड़े खतरे हैं इन्हीं की वजह से आज के समय पर जिन लोगों की मृत्यु होती है मलेरिया की वजह से वो इन्हीं की वजह से होती है तो क्लास सोडियम फल की परम और प्लाज्मोडियम विवेक्स! तो इसमें बुखार हो जाना बीमार हो जाना है ना शारीरिक का अपना सर में दर्द होना मसल्स के अंदर दर्द होना थकान बहुत ज्यादा होना ये!

इसके लक्षण हैं इसकी वैक्सिंग के लिए वैक्सीन बनाई गई है जिसका नाम है जो बेसिकली एक ब्रांड के नाम से जानी जाती है जिसका नाम मॉस्किटो एक्स mosquares बेसिकली एक वैक्सीन है बहुत सारे इसके ऊपर ट्रायल हुए हैं तब जाकर यहां पर पता चलता है की यहां वैक्सीन से ऐप है लेकिन अभी भी मलेरिया को पुरी तरह से खत्म नहीं करती 40% से रिस्क जो है वो कम करने का कम करती है ये वैक्सीन? उसमें एक लाइन कंपनी ने डिवेलप किया है और इसको अप्रूवल भी मिल चुका है यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी की साइड से 2015 में ये वैक्सीन करती क्या है हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत

की आपके बॉडी में अगर यह मलेरिया पैरासाइट आएगा आपके आरबीसी इस रेड ब्लड सेल्स को आपके लीवर को डैमेज करने की कोशिश करेगा तो? ये जो वैक्सीन है इसी मलेरिया पैरासाइट को अटैक करेगी इस मलेरिया पैरासाइट को यह हरकत करने नहीं देगी और खासकर कौन सा पैरासाइट मैंने आपको बताया पैरासाइट की पंच प्रजातियां जन्मे से दो प्रजातियां सबसे खतरनाक है एक तो प्लाज्मों? डिम दूसरा यहां पर मैंने आपको अभी ऑलरेडी बता दिया thalassemodium विवेक्स! इनको यहां पर रोकने का कम करती है वैक्सीन बात क्लियर हो गई अब होता क्या है हम लोग बहुत सारे अलग-अलग प्रकार के इनीशिएटिव चलते हैं मलेरिया को टैकल करने के लिए पहले हम देखेंगे की, दुनिया भर के अंदर? कौन-कौन से इनीशिएटिव स्टार्ट?

तो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने यह देखा लगभग 25 कंट्रीज को आईडेंटिफाई किया की इन 25 कंट्रीज के अंदर मलेरिया बहुत ज्यादा है तो हमने टारगेट ही रखा की 2025 तक हम इन 25 देशों में मलेरिया को खत्म कर देंगे तो इसीलिए हमने एक इनीशिएटिव स्टार्ट किया T20 25 ये 2025 तक हमें मलेरिया को इरेडिकेट करना है खत्म करना है ये इनीशिएट भी यहां पर स्टार्ट किया गया इसी प्रकार से वर्ल्ड है तो ऑर्गेनाइजेशन है ग्लोबल टेक्निकल स्ट्रेटजी यहां पर मलेरिया के लिए अप्लाई है 2016 से लेकर 2030 तक का टारगेट रखा है इनका यहां पर मकसद है की जो मलेरिया के केसेस हैं इनको हम लोग रिड्यूस कर देंगे कम कर देंगे मलेरिया से होने वाली मृत्यु है उनको कम कर देंगे 40% तक 2020 तक ये टारगेट का फिर उन्होंने बोला की 2025 तक हम 75% तक ये कम कर देंगे मलेरिया सोने वाली मृत्यु को फिर 2030 तक 90% से कम कर देंगे ये बेसिकली टारगेट लेकर चल रहे हैं?

अब इंडिया लेकर चल रहा है तो इंडिया के अंदर मलेरिया को एलिमिनेट करने के लिए ढेर सारे एफर्ट्स लगाए जा रहे हैं 2015 से हम 2015 में लॉन्च कर चुके हैं नेशनल फ्रेमवर्क फॉर मलेरिया एलिमिनेशन 2016 में बेसिकली लॉन्च किया गया था इसको मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के थ्रू तो ये जो नेशनल फ्रेमवर्क फॉर मलेरिया एलिमिनेशन है ना इसका भी बेसिकली टारगेट है ये हो की साइड से की भैया हम लोग क्या कर सकें हम मलेरिया को एलिमिनेट कर सकें? अलग-अलग लेवल पर टारगेट रखा है की इससे जो हो रहे हैं मृत्यु है उनको यहां पर कम किया जा सके इसके? साथ-साथ यहां?

पर हम लोग बेसिकली चार राज्यों को टारगेट कर कर चल रहे हैं वेस्ट बंगाल झारखंड छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश ये चार राज्य ऐसे हैं जहां पर मलेरिया का सबसे ज्यादा बर्डन है तो इन चार राज्यों को सही से टारगेट किया गया है ताकि यहां पर जो बर्डन है उनको हम लोग कम कर सकें बात क्लियर हो गई तो ये बेसिकली यहां पर सारा का सारा सिस्टम आपको देखने को मिलेगा मलेरिया को लेकर जितनी इनफॉरमेशन मैंने दी है ये बिल्कुल इनफ है कोई भी सवाल आएगा? सवाल को सॉल्व कर पाओगे चाहे वो प्रीमियम शो चाहे वो मांस हो आप देखो इनफेक्ट यूपीएससी ने भी साल 2010 में!

सवाल पूछा था सवाल क्या था वाइड स्प्रेड रेजिस्टेंस ऑफ मलेरिया पैरासाइट तू ड्रग्स लाइक chloroquin हे प्रमोटेड अटेम्प्ट तू डिवेलप अन मलेरिया वैक्सीन तू कॉम्बैट मलेरिया पहले तो क्या हुआ ना मलेरिया को ठीक करने के लिए हमारे पास में कुछ दवाइयां थी लेकिन हुआ क्या की वो पैरासाइट जो है वो और स्ट्रांग हो गया और उसके ऊपर दवाइयां का कोई असर नहीं हुआ तो? एक्शन को बनाया! वैक्सीन का कम क्या है की मलेरिया को कंबेड करना मलेरिया से लड़ना तो यहां पे जो मलेरिया वैक्सीन को आप बना रहे द तो इसमें क्या इतनी चीज डिफिकल्टी क्या इतनी परेशानियों हमें हो रही थी इस मलेरिया वैक्सीन को इफेक्टिव बनाने में क्या-क्या परेशानियों हो रही थी उसके बारे में आपको बताया पूछ रहा है आपसे?

तो पहला स्टेटमेंट बोलता है मलेरिया क्योंकि होता है अलग-अलग प्लाज्मोडियम की स्पीशीज की वजह से दूसरा यहां पर जो मैन है ना? मतलब नहीं कर पता! तो लड़ने के लिए ड्यूरिंग डी नेचुरल इन्फेक्शन तीसरा यहां पर जो वैक्सीन है ये बेसिकली यहां पर डिवेलप करेगा ये केवल और केवल बैक्टीरिया के अगेंस्ट में ऑप्शन नंबर दी जो मैन है ना ये बेसिकली एक इंटरमीडिएट होस्ट है और यहां पर नॉट डी डेफिनेटली होस्ट बेसिकली इंटरमीडिएट होस्ट की तरह यहां पर में देखने को मिलता है वैसे जो भी आपने चारों पड़े है ना इन चारों में सब बहुत आराम!

एक को चूज कर सकते हो वह क्या है अभी हमें थोड़ी देर पहले ही पड़ा था की जो मलेरिया है ना यह क्या कर रहा है यह कहीं ना कहीं जो ये वैक्सीन है बेसिकली जो वैक्सीन है इसका कम क्या है की जो हमारा आईएमटी सिस्टम है उसको यहां पे डिवेलप करना तो वैक्सीन को बनाने में इफेक्टिव बनाने में टाइम इसलिए लगा क्योंकि हमें इम्यूनिटी सिस्टम को लेकर कम करना था इम्यून सिस्टम को और ज्यादा मजबूत बनाना था तो इस वजह से ऑप्शन भी जो है बिल्कुल सही है क्योंकि होता है यहां पर यह है की मैन की जो इम्यूनिटी है ना वो डिवेलप नहीं हो पाती इस मलेरिया से लड़ने में इस वजह से यहां पर वैक्सीन बनाई गई और इस वैक्सीन का कम यही है की इम्यूनिटी सिस्टम को डिवेलप किया जा सके ताकि वो प्लाज्मोडियम जो भी स्पीशीज हैं उनसे लड़ सके ठीक है ना तो बात यहां पर क्लियर हो गई बाकी मलेरिया के बारे में जो भी इनफॉरमेशन थी वो मैंने आपके साथ में ऑलरेडी डिस्कस कर ली है तो ऐसा सवाल एक


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