तमिलनाडु में पावर ग्रिड के खिलाफ हंगर स्ट्राइक किसानों द्वारा

दोस्तों अगर आपका ट्रांसमिशन लाइन में काम कर रहे हैं तो आपने राइट ऑफ से के बारे में जरूर सुना होगा तो आज मैं आपको बताने वाला हूं एक ऐसे राइट अवे के बारे में जो शायद फिर लिया का सबसे बड़ा राइट अवे होने वाला है

13 13 जिलों के किसान अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने वाले हैं यह सब किसान तमिलनाडु के त्रिचुर जिले के हैं

उनकी डिमांड है कि जो हाई वोल्टेज लाइन जा रही है वह अंडरग्राउंड केबल के द्वारा जमीन के अंदर से ले जाए जाए ना कि हाई वोल्टेज टावर लगा कर क्योंकि पूरे कॉरिडोर में काफी सारी कृषि योग्य भूमि पढ़ रही है जिससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है इसलिए उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने का फैसला ले लिया है

पावर ग्रिड द्वारा 1830 किलोमीटर की हाई वोल्टेज लाइन तमिलनाडु के तृतीय जिले से लेकर छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले तक बिछाई जानी है

इस प्रोजेक्ट के कंप्लीट होने से रिन्यूएबल एनर्जी से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को नेशनल ग्रिड के साथ कनेक्ट किया जाएगा जिससे काफी फायदा होने वाला है परंतु तमिलनाडु के किसान हाई वोल्टेज टावर को लगने नहीं देना चाहते हैं उनका कहना है कि टावर की जगह अंडरग्राउंड केबल बिछाई जाए ताकि टावर के कारण होने वाले कृषि के नुकसान को कम से कम किया जा सके यह मुद्दा काफी राजनीति पकड़ चुका है और इसमें कई राजनीतिक पार्टियां भी शामिल हो गई हैं

किसानों की मांगे हैं कि पहले से जो ट्रांसमिशन लाइन के टावर लगे हैं जिनकी भूमि पर लगे हैं उसका किराया दिया जाए और अंडर ग्राउंड का अंडरग्राउंड केबल के थ्रू ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण कार्य किया जाए परंतु सरकार यह सब मांगों को नहीं मानेंगे आने वाली है सरकार इसके लिए पहले ही मना कर चुकी है ऐसे में 13 जिलों के किसान मिलकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं ऐसे में यह मुद्दा काफी गर्म आ गया है और एमडीएमके के लीडर वाइको इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का श्री गणेश करेंगे

पता नहीं इस ट्रांसमिशन लाइन के प्रोजेक्ट का फ्यूचर क्या होगा मुझे लगता है कि अब कुछ एडवांस टेक्नोलॉजी आनी चाहिए जिससे कम से कम इस प्रेस में मैक्सिमम पावर ट्रांसफर करके ग्रेट को कनेक्टिविटी दी जा सके और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके क्योंकि जिस तरह के हालात देश में बन रहे हैं ट्रांसमिशन लाइंस को लेकर आने वाले भविष्य में ट्रांसमिशन का निर्माण कार्य बहुत ही कठिन हो जाएगा और बात भी सही है क्योंकि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के अंतर्गत जो पुराना मुआवजे का प्रावधान है वह वाकई में बहुत ही कम है और वाकई में किसानों की जिम्मी ने नष्ट हो जा रही हैं कम से कम इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के अंतर्गत जो मुआवजा दिया जाना है उसे बढ़ाकर जमीन के बराबर मूल्य यदि गवर्नमेंट के द्वारा दे दिया जाए तो हो सकता है कि आने वाले वक्त में इन ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण कार्य में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सकता है

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