आज ही बदल डालिए है यह आदत

कुछ लोगों को हर जगह देर से पहुंचने की आदत होती है कुछ लोग कहीं भी बगैर सोचे-समझे बोल पड़ते हैं वहीं कुछ दूसरों को बात काटने में अपनी वाहवाही समझते हैं यह सभी आदत बेशक के सामान से लगे लेकिन यह समाज की रिश्तो के लिहाज से बिल्कुल सही नहीं है इस तरह के व्यवहार के कारण लोग ऐसे व्यक्ति से दूर ही रहना पसंद करते हैं आज हम ऐसी ही कुछ आदतों यह सैनिकों का जिक्र कर रहे हैं आइए नजर डालते हैं

दूसरों के समय की कद्र ना करना



कुछ लोग जगह देर से पहुंचते हैं लेटलतीफी धीरे-धीरे उनकी आदत में शामिल हो जाती है उन्हें लगता है कि 5 या 10 मिनट की देर तो सामान्य है अपनी इस आदत के कारण लोगों को बेवजह इंतजार करवाते हैं अगर आप भी इस तरह का व्यवहार करते हैं तो उसे बदल लीजिए क्योंकि समय की कद्र करना जरूरी है फिर चाहे वह आपका हो या किसी और का है

कुछ भी कहने से पहले ना सोचना


कुछ लोगों में बहुत ज्यादा बोलने की आदत होती है इस कारण उठकर मुंह से तब क्या निकल जाता है उन्हें भी पता नहीं चलता इसलिए कुछ भी कहने या करने से पहले एक बार जरूर सोचना चाहिए कि अगले व्यक्ति पर उस बात का क्या असर पड़ेगा कहीं ऐसा ना हो कि आपके द्वारा जल्दी बाजी में कही गई किसी बात से उसे बुरा लग जाए इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि आप किस के सामने क्या कहने जा रहे हैं एक बार थोड़ा रुके फिर बोले इससे आपको सोचने का समय मिल जाएगा

दूसरों की बात को पूरा न सुनना

अधिक बोलने की आदत के कारण कुछ लोग यह भूल जाते हैं कि दूसरे व्यक्ति भी कुछ कह रहा है यह सामने वालों की बात में अपनी किसी पर बात को ले आते हैं कई बार अनजाने में ऐसा हो जाता है पर यदि हर बार आप ऐसा करते हैं तो लोग आपसे बात करने में बचने लगते हैं उसके मन में छवि बन जाती है कि वह व्यक्ति किसी की नहीं सुनता तो इससे क्यों कुछ कहना

छोटी-छोटी बात पर नाराज होना

ज़रा ज़रा बात पर नाराज होना कुछ लोगों के स्वभाव में शामिल हो जाता है अपने स्वभाव के कारण भी किसी बात के पसंद आने या किसी बात से असहमति होने पर सीधे नाराजगी जताने लगे हैं उनकी यह आदत के कारण लोग उनसे कुछ भी कहने से पहले कई बार सोचते हैं या ऐसे लोगों से दूरी बना कर रखना ही बेहतर समझते हैं इस तरह का व्यवहार सहनशीलता की कमी दर्शाता है इसलिए छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने की आदत यदि आप में भी है तो उसे जल्दी से बदल डालिए

ऊंची आवाज में बोलना

अपनी बात को सही साबित करने के लिए भी लोग जोर से बोलने लगते होने लगता है क्योंकि आवाज में बात करने पर उनकी बात सुनी जाएगी जबकि ऐसा नहीं है ऊंची आवाज कानों को चुप दी है वहीं सामान्य आवाज सुनने में बहुत अच्छी लगती है जब आप सोच समझकर संयमित लहजे में बात करते हैं तो आप सभी बात को ध्यान से सुनते भी हैं


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